उन्होंने आगे कहा कि मोदी सरकार
ने निजीकरण और ठेकेदारी प्रथा से बहुत सीमा तक आरक्षण को खत्म कर दिया है।
सरकारी प्रतिष्ठानों और विभागों को औने पौने कीमत पर बेच दिया ताकि सरकारी
नौकरी रहे हीं न। लेटरल एंट्री के द्वारा बिना
आरक्षण के आईएएस बनाने
का कार्य इसी सरकार ने किया। संविधान की धारा 15(5) को न लागू करके अच्छी
और गुणवत्ता वाली शिक्षा से दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और आदिवासी को वंचित
कर दिया है। धर्मांतरण के नाम पर ईसाइयों और मुसलमानों को निरंतर प्रताड़ित
किया जा रहा है । जबसे EWS लागू हुआ है, तबसे ज्यादातर नौकरियाँ उनको ही
मिल रहीं जो पहले से विकसित थे। जिन पदों पर आरक्षण नहीं है, जैसे कुलपति,
उच्चन्यायपालिका और अन्य प्रमुख विभाग वहां केवल आरएसएस की सोच वालों को
रखा जा रहा है। लाखों पद खाली पड़े हैं लेकिन सरकार नहीं भर रही और
आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम कराया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 'धर्म
सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार' मामले में आउटसोर्सिंग को शोषण का साधन
मानते हुए विभिन्न विभागों में संविदा पर कार्य कर रहे लगभग 11 लाख
कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश दिया था, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद संविदा कर्मचारियों को नियमित करने के
बजाय उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सर्विस निगम लिमिटेड बनाया है। यह निगम
₹16,000-₹20,000 के सीमित वेतन पर कर्मचारियों को रखेगी और हमेशा के लिए
सरकारी नौकरी का रास्ता बंद कर दिया है।
हम किसी भी कीमत पर संविधान बचाने का कार्यक्रम करेंगे।
आज
की प्रेस वार्ता में एड. शाहिद अली - राष्ट्रीय महासचिव, श्री सत्य नारायण
– प्रधान महासचिव, श्री कुनाल बिहारी - राष्ट्रीय महासचिव, एड. सतीश सांसी
– राष्ट्रीय कॉर्डिनेटर, इं. ए. पी. खान – दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष, डॉ.
अंशु एंथनी – कार्यकारी अध्यक्ष दिल्ली प्रदेश, भी शामिल रहे।